भारतीय संविधान मेँ जिस धर्मनिरपेक्षता शब्द की व्याख्या है उसका मूल अर्थ सर्व धर्म समभाव के रूप मे ग्रहण किया गया था . अंगरेजों ने हमारे देश को एक बार बाटा ,लेकिन हमारे ये स्वधोषित धर्मनिरपेक्ष राजनेता हर रोज इस गौरवमयी राष्ट्र को बांट रहे हैं . क्या आज अल्पसंख्योकोँ के क्लयाण के नाम पर ओछी राजनीति एक अच्छे भले सद्भावपुर्ण वातावरण को समाप्त करने का काम नही कर रही है ? अब वो समय आ गया है जब इसतरह की तुष्टीकरण से अल्यसंख्यक समुदाय के लोगों को सोचने पर मजबूर होना चाहिए कि क्या उन्हेँ सिर्फ वोट बैंक बन कर रहना है या सम्मानित नागरिक . स्वघोषित धर्मनिरपेक्ष दलोँ को भी देश की जनता को बताना होगा की आखिर कब तक तुष्टीकरण की राजनीति के नाम पर देश हित सुली पर लटकता रहेगा ? धर्मनिरपेक्षता की आड मे ओछी राजनीति करनेवाले राजनीतिज्ञ हजारो वर्ष पुरानी सभ्यता को मिटाने का पड्यंत्र रच रहे है
मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्य और संगीत दोनों ही आत्मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्छा लगे तो ठीक, अच्छा न लगे तो आपकी इच्छा ।



