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घर हो या बाहर हमेशा महिला को ही गलत कहा जाता है.सब लोग गलत नजर से देखते है नारी के प्रती बिल्कुल गलत नजरिया रखते है लोग .समय बदल गया है लेकिन पुरूषोँ की मानसिकता अभी भी नही बदली है. सडक पर कोई घटना घटित हो जाये तो सबसे पहले महिलाओँ के चरित्र पर ही सवाल उठाये जाते हैँ . कार्यस्थल पर अगर कोई महिला सहिला सहकर्मी उत्पीडन की शिकायत करती है तो उसे ही शक की निगाहोँ से देखा जाने लगता है . जन्म से ही लडकियोँ को मर्यादा मेँ रहने की सीख दी जाती है । इसके खिलाफ अगर महिला आवाज उठाती है तो उसे ही गुनहगार मान लिया जाता है । इन सब के बावजुद महिलाएं हर क्षेत्र मेँ अच्छा प्रदर्शन कर रही है । अब समाज को भी अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है तभी हम एक सुन्दर समाज बना सकते है

मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्‍य और संगीत दोनों ही आत्‍मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्‍मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्‍छा लगे तो ठीक, अच्‍छा न लगे तो आपकी इच्‍छा ।