ईट और पत्थरों से बनता है जो मकान
मै बनाऊंगा ए सिर्फ कह सकता हु
सपने झूठे दिखा सकता हु
कवि हु तो कल्पनाओं के महल बना सकता हु
हकीकत की जमी पर ए मुमकिन नही
बैंक भी दे लोन अपन इसके काबिल नही
हा तुम साथ जो दोगे
मेरी तंगहाली को सरमाथे से लगाओगे
तो प्यारा सा घर कही भी बना लेंगे
टिन टप्पर में भी अपनी दुनिया बसालेंगे
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मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्य और संगीत दोनों ही आत्मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्छा लगे तो ठीक, अच्छा न लगे तो आपकी इच्छा ।








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