पहले दामिनी...फिर गुड़िया...फिर आने वाले कल में ...कोई और ?चाणक्य ने कहा है-यदि राजा अपने देश में...राज्य की रक्षा...प्रजा की सुरक्षा...प्रजा पर होने वाले अत्याचारों पर अंकुश लगाने में...और दोषियों को दंड देने में असमर्थ हो...तो प्रजा को स्वयं के हित के लिए किसी कुशल राजा की पुनः नियुक्ति के विषय में भी विचार कर लेना चाहिए !
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मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्य और संगीत दोनों ही आत्मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्छा लगे तो ठीक, अच्छा न लगे तो आपकी इच्छा ।








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