एक समय था जब लड़की पैदा होती थी, तब हम कहते थे कि लक्ष्मी का आगमन हुआँ है। लेकिन आज वक्त बदल गया है। आज के समय में तो अधिकतर लोग लड़की को तो पैदा ही नहीं होने देना चाहते है और अगर किसी माँ कि हिम्मत की बजह से कोई लड़की पैदा हो भी जाती है तो लोग उसे ना जाने किन किन गिरे हुए नामों से बुलाते है। हमे यह कहने मे भी शर्म आती है।हमारा समाज यह क्यो भुलते जा रहा है कि,हमारा अस्तित्व भी आज किसी लड़की के बदौलत ही है। यही बजह है कि प्रति 1000 लड़को पर मात्र 933 लड़कियाँ ही बच गई है और लड़कियों की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती ही जा रही है। आखिर हमारा समाज लड़कियों के साथ ही भेदभाव क्यों कर रहा है? लड़कियों को भी जीने का हक है। दूनियाँ आज चाँद पर पहुँच चूँकि है। और हमारा देश बहुत तेज़ी से विकास कर रहा है। विज्ञान ने हमें एक से एक नई तकनीक दी है। लेकिन फिर भी हमारी मानसिकता वही की वही है। हम आज भी लड़कियों को बोझ समझते है। उसे पढाते-लिखाते नहीं है क्योंकि हमारी मानसिकता बन चुँकि है की उसे तो एक दिन चौका-बर्तन ही करना है। लेकिन हम यह क्यो भुल रहे है कि लड़कियाँ भी आज लड़को के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। हमारे देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल वह भी तो एक लड़की ही थी। आज सारी लड़कियों के लिए वह एक मिशाल है। जब एक लड़की राष्ट्रपति बन सकती है तब फिर भेदभाव क्यों? हमें अपनी सोच को बदलना होगा तभी समाज बदलेगा। शुरुआत अपने घर से ही करनी होगी
मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्य और संगीत दोनों ही आत्मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्छा लगे तो ठीक, अच्छा न लगे तो आपकी इच्छा ।
0 टिप्पणियाँ:
Post a Comment