लागातार विरोध आन्दोलन के बावजूद महिलाओँ व युवतियो के खिलाफ हिंसा व दुष्कर्म की घटनाएं घट रही है . हमारे समाज को क्या हो गया है ? क्या लोगो की बुध्दी भ्रष्ट हो गई हो क्यो वे चोचना भुल गय है रिश्ते नाते भुल गय है या वे ऐ भुल गय है की वे भारत के उन महान व्यक्तीयो के धरती पे निवास करते है जहाँ ...बुध्द , माहाविर ,नानक ,कबिर ,दयानंद ,विवेकान्द एवम रामकृष्ण समेत अन्य महानपुरूषो की जन्मस्थल पर हम निवास करते है क्या हम यह भुल गय है? या इनके उपदेश का असर हमारे समाज पर नही रह गया ? कई सवाल है । रावण बध को उत्सुकता के साथ देखनेवाली आंखे क्या पथर हो गयी है? क्या हमारे अन्दर के मानवीय विचार और संवेदना सुन्य हो गइ है ? सामुहीक सोच ,सामुहीक पहल के साथ सोचना होगा समाज को क्या धोखा ,विश्वाघात और भ्रष्ट तौर तरिके से अर्जित धन और आवारा पूंजी का प्रभाव इसके लिए जिम्मेवार नही है? नही तो क्या कारण है कि देवी देवताओँ और माता की पुजा -अर्चना करने वाले हाथ हिंसा और दुष्कर्म करने के लिए बढ जाते है
मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्य और संगीत दोनों ही आत्मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्छा लगे तो ठीक, अच्छा न लगे तो आपकी इच्छा ।









0 टिप्पणियाँ:
Post a Comment