• Feed RSS

Pages

ज्यादातर लोगोँ को लगता है कि जबसे इंटरनेट और फेसबुक का जमाना आया है , तबसे किताबोँ की वकत कम हो गयी है , लेकिन किताबोँ का तो अपना ही मजा है . अपनी ही सहूलियत है . और अपने ही लाभ भी है . किताबे सिर्फ जानकारी नही देती ,किताबे सिर्फ मनोरंजन नही करती . वे सांस्कारित भी करती है , जीने का सलीका भी सिखाती है और रिश्ते के मर्म को महसूसने की अदा भी .इसलिए किताबोँ की वकत कभी भी कम न होगा . वे हमेशा प्रासंगिक बनी रहेँगी और बेहतर समाज के निर्माण के लिए मानवीयता को प्रेरित करती है रहेंगी .गांधी जी कहा करते थे  ,अ हाउस विदाउट बुक इज  अ हाउस विदाउट विंडो . किताबेँ आपको सोचने और समझने को प्रेरित करती है . मनुष्य मेँ रचनात्मक का बोध तो किताबेँ ही पैदा कर सकती हैँ .विविधतापूर्ण संसार को समझने व जानने का बेहतर जरिया किताबेँ ही है .
इतिहास में बहुत सारे ऐसे मौके आये जब बाहरी लोगों ने भारत , बिहार पर आक्रमण किया लेकिन उस समय भी भोजपुरी संगीत पर ऐसे संकट के बादल नहीं मंडराए जैसे आज कल के कुछ स्वार्थी संगीतकारों, गायकों और फनकारों की वजह से आया है। समूचा भोजपुरी समाज आज के उन गीतकारों, गायकों और उन फनकारों से एक विनती करता है। हे लेखक वीरों, माँ सरस्वती ने तुम्हारी कलम में वो ताकत दी है जिसे दुनिया सलाम कराती है,क्यों उसका इस्तेमाल असभ्य और अशिष्ट गीतों के लिए कर रहे हो, भोजपुरिया समाज की सभ्यता और संस्कृति को पुरे विश्व में गीतों के जरिये दिखाने का जिम्मा आपका है। ऐसा क्या हो गया कि आज आपकी कलम क्यों केवल समियाना, लहंगा, मीटर और चोली में अटक कर रह गयी, क्यों आपके गीतों का हीरो एक बदमिजाज और बदतमीज आशिक है ? आप वीरों की गाथाओं को क्यों भूल गए, आपके गीतों के नायक वीर बाँकुड़ा बाबू कुंवर सिंह, देशरत्न राजेंद्र बाबु भिखारी ठाकुर मंगल पाण्डेय और चितु पाण्डेय क्यों नहीं है ? भगवान के लिए अपने गीतों में नायकों की गाथाओं का उल्लेख करें।
मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्‍य और संगीत दोनों ही आत्‍मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्‍मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्‍छा लगे तो ठीक, अच्‍छा न लगे तो आपकी इच्‍छा ।