इतिहास में बहुत सारे ऐसे मौके आये जब बाहरी लोगों ने भारत , बिहार पर आक्रमण किया लेकिन उस समय भी भोजपुरी संगीत पर ऐसे संकट के बादल नहीं मंडराए जैसे आज कल के कुछ स्वार्थी संगीतकारों, गायकों और फनकारों की वजह से आया है। समूचा भोजपुरी समाज आज के उन गीतकारों, गायकों और उन फनकारों से एक विनती करता है। हे लेखक वीरों, माँ सरस्वती ने तुम्हारी कलम में वो ताकत दी है जिसे दुनिया सलाम कराती है,क्यों उसका इस्तेमाल असभ्य और अशिष्ट गीतों के लिए कर रहे हो, भोजपुरिया समाज की सभ्यता और संस्कृति को पुरे विश्व में गीतों के जरिये दिखाने का जिम्मा आपका है। ऐसा क्या हो गया कि आज आपकी कलम क्यों केवल समियाना, लहंगा, मीटर और चोली में अटक कर रह गयी, क्यों आपके गीतों का हीरो एक बदमिजाज और बदतमीज आशिक है ? आप वीरों की गाथाओं को क्यों भूल गए, आपके गीतों के नायक वीर बाँकुड़ा बाबू कुंवर सिंह, देशरत्न राजेंद्र बाबु भिखारी ठाकुर मंगल पाण्डेय और चितु पाण्डेय क्यों नहीं है ? भगवान के लिए अपने गीतों में नायकों की गाथाओं का उल्लेख करें।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्य और संगीत दोनों ही आत्मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्छा लगे तो ठीक, अच्छा न लगे तो आपकी इच्छा ।









0 टिप्पणियाँ:
Post a Comment