ज्यादातर लोगोँ को लगता है कि जबसे इंटरनेट और फेसबुक का जमाना आया है , तबसे किताबोँ की वकत कम हो गयी है , लेकिन किताबोँ का तो अपना ही मजा है . अपनी ही सहूलियत है . और अपने ही लाभ भी है . किताबे सिर्फ जानकारी नही देती ,किताबे सिर्फ मनोरंजन नही करती . वे सांस्कारित भी करती है , जीने का सलीका भी सिखाती है और रिश्ते के मर्म को महसूसने की अदा भी .इसलिए किताबोँ की वकत कभी भी कम न होगा . वे हमेशा प्रासंगिक बनी रहेँगी और बेहतर समाज के निर्माण के लिए मानवीयता को प्रेरित करती है रहेंगी .गांधी जी कहा करते थे ,अ हाउस विदाउट बुक इज अ हाउस विदाउट विंडो . किताबेँ आपको सोचने और समझने को प्रेरित करती है . मनुष्य मेँ रचनात्मक का बोध तो किताबेँ ही पैदा कर सकती हैँ .विविधतापूर्ण संसार को समझने व जानने का बेहतर जरिया किताबेँ ही है .
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मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्य और संगीत दोनों ही आत्मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्छा लगे तो ठीक, अच्छा न लगे तो आपकी इच्छा ।









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