किसी भी धार्मिक संप्रदाय का जन्म ईश्वर की प्राप्ति के एक मार्ग के रूप
में होता है. मगर आदमी अपनी कलुषता के कारण अपने सम्प्रदाय अथवा धर्म को
दंगे जैसे कृत्य से कलंकित करने का गुनाह करता है. मेरे कुछ सबसे
अच्छे दोस्त मुस्लिम हैं और मैं कभी उनका अहित सोच
भी नहीं सकता और वे भी मेरे लिए हर त्याग करने को सदा तत्पर रहते हैं.
………… प्रशासन को चाहिए की दंगाइयों को अपराधी मानते हुवे उन्हें शीघ्र
नियंत्रित करे.हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दंगे में जिनका खून बहता
है वे सभी अमूमन निर्दोष लोग ही होते हैं. दंगो में बच्चे, बूढ़े और दूध
पिलाती महिलाएं हिंसा की ग्रास बनती हैं. और किसी निर्दोष का लहू बहाना
किसी भी धर्म में पाप हीं बताया गया है. सिर्फ इसलिए की कोई व्यक्ति
दुसरे धर्म का है, हम उसकी हत्या कर दें यह कहाँ का इन्साफ हो सकता है ? सभी से मेरा यही निवेदन है कि कोई भी दंगा में शामिल न हो तथा यदि
कोई दंगा फैला रहा है तो उसे आप पूरी ताकत से रोकें। एक दंगाई न तो
हिन्दू होता है, न मुसलमान होता है, उसकी अवस्था एक पागल कुत्ते की हो
जाती है जो मानवता को काट खाने के लिए दौड़ता है.
मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्य और संगीत दोनों ही आत्मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्छा लगे तो ठीक, अच्छा न लगे तो आपकी इच्छा ।








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