भारतीय संविधान मेँ जिस धर्मनिरपेक्षता शब्द की व्याख्या है उसका मूल अर्थ सर्व धर्म समभाव के रूप मे ग्रहण किया गया था . अंगरेजों ने हमारे देश को एक बार बाटा ,लेकिन हमारे ये स्वधोषित धर्मनिरपेक्ष राजनेता हर रोज इस गौरवमयी राष्ट्र को बांट रहे हैं . क्या आज अल्पसंख्योकोँ के क्लयाण के नाम पर ओछी राजनीति एक अच्छे भले सद्भावपुर्ण वातावरण को समाप्त करने का काम नही कर रही है ? अब वो समय आ गया है जब इसतरह की तुष्टीकरण से अल्यसंख्यक समुदाय के लोगों को सोचने पर मजबूर होना चाहिए कि क्या उन्हेँ सिर्फ वोट बैंक बन कर रहना है या सम्मानित नागरिक . स्वघोषित धर्मनिरपेक्ष दलोँ को भी देश की जनता को बताना होगा की आखिर कब तक तुष्टीकरण की राजनीति के नाम पर देश हित सुली पर लटकता रहेगा ? धर्मनिरपेक्षता की आड मे ओछी राजनीति करनेवाले राजनीतिज्ञ हजारो वर्ष पुरानी सभ्यता को मिटाने का पड्यंत्र रच रहे है
फेसबुक बनाने वालेँ ने भी कभी नही सोचा होगा कि इस सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए भी कई गलत काम हो सकता है । आंकडो के मुताबित देखेँ तो आज सेक्स रिलेटेड क्राइम मे सोशल नेटर्किंग साइट भी अहम रोल अदा कर रहा है । आज कल फेक अइडेंटिटी के जरिए एक दुसरे के करिब आना और फिर उनकी पर्सनल लाईफ के महत्वपुर्ण पहलुओँ और तस्वीरोँ को फेसबुक पर डाल देना आम बात हो गई है । कुछ मामलोँ मेँ तो साइबर सेल की सक्रियता के कारण तो अपराधी पकड लिए जाते है .लेकीन ज्यादातर मामलोँ मेँ अपराधी पकड से दुर हो जाते है । वही , बदनाम होने के डर से पीडित भी खुद को दुनिया के सामने नही आते ।नतिजा ऐसे अपराधियोँ का हौशला बढता जाता है और फिर नए शिकार की तलाश मे लग जाते है । कहने का मतलब ऐ है की इंटरनेट के इस्तमाल मेँ हमे सर्तक रहने की जरुरत है .सोशल नेटवर्किंग साइट हो या फिर अन्य मीडियम इंटरनेट पर फ्रेँडसिप करने से पहले हमेँ दुसरे व्यक्ति का प्रोफाइल की पूरी जानकारी होनी चाहिए । पर्सनल लाइफ की महत्वपुर्ण चीँजो को खुलासा करने से पहले भी हमेँ सर्तक रहना चाहिए ।इसके बावजुद भी अगर आप साइबर क्राइम के शिकार हो गए हो तो सइबर सेल का मदद लेँ .
किसी भी धार्मिक संप्रदाय का जन्म ईश्वर की प्राप्ति के एक मार्ग के रूप
में होता है. मगर आदमी अपनी कलुषता के कारण अपने सम्प्रदाय अथवा धर्म को
दंगे जैसे कृत्य से कलंकित करने का गुनाह करता है. मेरे कुछ सबसे
अच्छे दोस्त मुस्लिम हैं और मैं कभी उनका अहित सोच
भी नहीं सकता और वे भी मेरे लिए हर त्याग करने को सदा तत्पर रहते हैं.
………… प्रशासन को चाहिए की दंगाइयों को अपराधी मानते हुवे उन्हें शीघ्र
नियंत्रित करे.हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दंगे में जिनका खून बहता
है वे सभी अमूमन निर्दोष लोग ही होते हैं. दंगो में बच्चे, बूढ़े और दूध
पिलाती महिलाएं हिंसा की ग्रास बनती हैं. और किसी निर्दोष का लहू बहाना
किसी भी धर्म में पाप हीं बताया गया है. सिर्फ इसलिए की कोई व्यक्ति
दुसरे धर्म का है, हम उसकी हत्या कर दें यह कहाँ का इन्साफ हो सकता है ? सभी से मेरा यही निवेदन है कि कोई भी दंगा में शामिल न हो तथा यदि
कोई दंगा फैला रहा है तो उसे आप पूरी ताकत से रोकें। एक दंगाई न तो
हिन्दू होता है, न मुसलमान होता है, उसकी अवस्था एक पागल कुत्ते की हो
जाती है जो मानवता को काट खाने के लिए दौड़ता है.
ज्यादातर लोगोँ को लगता है कि जबसे इंटरनेट और फेसबुक का जमाना आया है , तबसे किताबोँ की वकत कम हो गयी है , लेकिन किताबोँ का तो अपना ही मजा है . अपनी ही सहूलियत है . और अपने ही लाभ भी है . किताबे सिर्फ जानकारी नही देती ,किताबे सिर्फ मनोरंजन नही करती . वे सांस्कारित भी करती है , जीने का सलीका भी सिखाती है और रिश्ते के मर्म को महसूसने की अदा भी .इसलिए किताबोँ की वकत कभी भी कम न होगा . वे हमेशा प्रासंगिक बनी रहेँगी और बेहतर समाज के निर्माण के लिए मानवीयता को प्रेरित करती है रहेंगी .गांधी जी कहा करते थे ,अ हाउस विदाउट बुक इज अ हाउस विदाउट विंडो . किताबेँ आपको सोचने और समझने को प्रेरित करती है . मनुष्य मेँ रचनात्मक का बोध तो किताबेँ ही पैदा कर सकती हैँ .विविधतापूर्ण संसार को समझने व जानने का बेहतर जरिया किताबेँ ही है .
इतिहास में बहुत सारे ऐसे मौके आये जब बाहरी लोगों ने भारत , बिहार पर आक्रमण किया लेकिन उस समय भी भोजपुरी संगीत पर ऐसे संकट के बादल नहीं मंडराए जैसे आज कल के कुछ स्वार्थी संगीतकारों, गायकों और फनकारों की वजह से आया है। समूचा भोजपुरी समाज आज के उन गीतकारों, गायकों और उन फनकारों से एक विनती करता है। हे लेखक वीरों, माँ सरस्वती ने तुम्हारी कलम में वो ताकत दी है जिसे दुनिया सलाम कराती है,क्यों उसका इस्तेमाल असभ्य और अशिष्ट गीतों के लिए कर रहे हो, भोजपुरिया समाज की सभ्यता और संस्कृति को पुरे विश्व में गीतों के जरिये दिखाने का जिम्मा आपका है। ऐसा क्या हो गया कि आज आपकी कलम क्यों केवल समियाना, लहंगा, मीटर और चोली में अटक कर रह गयी, क्यों आपके गीतों का हीरो एक बदमिजाज और बदतमीज आशिक है ? आप वीरों की गाथाओं को क्यों भूल गए, आपके गीतों के नायक वीर बाँकुड़ा बाबू कुंवर सिंह, देशरत्न राजेंद्र बाबु भिखारी ठाकुर मंगल पाण्डेय और चितु पाण्डेय क्यों नहीं है ? भगवान के लिए अपने गीतों में नायकों की गाथाओं का उल्लेख करें।
आपने भी पढ़ा होगा इस तरह की पंक्तियों को, कि गर्व से कहो हम हिन्दू हैं, एक बिहारी सौ पे भारी, जय मराठा, गर्व से कहो हम भारतीय हैं, आदि, आदि। ............... अब यह सोंचने की बात है कि यदि कोई कहेगा की मैं सौ पर भारी हूँ, तो कोई दूसरा ऐसा तो कह हीं सकता है न, कि भैया, मैं तो हज़ार पर भारी हूँ। पुनः किसी हिन्दू को यदि हिन्दू होने पर गर्व है, तो किसी को मुस्लिम या इसाई या सिख होने पर भी गर्व होना कोई अचरज की बात नहीं होगी। .............. मेरा कहना सिर्फ यह है की हमने धरती को और मनुष्यों को न जाने कितने टुकड़ों में बाँट रखा है। जबकि यहबाँटना हकीक़त में सम्भव हीं नहीं है। पूरी धरती एक है और पूरी मनुष्यता एक है। ............. यदि हमें गर्व हीं करना है तो दो बातों का गर्व हम कर सकते हैं। पहला यह कि हम इस सुन्दरता से परिपूर्ण धरती के वासी हैं, और दूसरा यह, कि हम इस धरती के सबसे विकसित प्राणी मनुष्य की संतान हैं। ............ हमारेशास्त्रों ने इसीलिए हजारों वर्षपहले हीं "वसुधैव कुटुम्बकम" की बात की थी।
लागातार विरोध आन्दोलन के बावजूद महिलाओँ व युवतियो के खिलाफ हिंसा व दुष्कर्म की घटनाएं घट रही है . हमारे समाज को क्या हो गया है ? क्या लोगो की बुध्दी भ्रष्ट हो गई हो क्यो वे चोचना भुल गय है रिश्ते नाते भुल गय है या वे ऐ भुल गय है की वे भारत के उन महान व्यक्तीयो के धरती पे निवास करते है जहाँ ...बुध्द , माहाविर ,नानक ,कबिर ,दयानंद ,विवेकान्द एवम रामकृष्ण समेत अन्य महानपुरूषो की जन्मस्थल पर हम निवास करते है क्या हम यह भुल गय है? या इनके उपदेश का असर हमारे समाज पर नही रह गया ? कई सवाल है । रावण बध को उत्सुकता के साथ देखनेवाली आंखे क्या पथर हो गयी है? क्या हमारे अन्दर के मानवीय विचार और संवेदना सुन्य हो गइ है ? सामुहीक सोच ,सामुहीक पहल के साथ सोचना होगा समाज को क्या धोखा ,विश्वाघात और भ्रष्ट तौर तरिके से अर्जित धन और आवारा पूंजी का प्रभाव इसके लिए जिम्मेवार नही है? नही तो क्या कारण है कि देवी देवताओँ और माता की पुजा -अर्चना करने वाले हाथ हिंसा और दुष्कर्म करने के लिए बढ जाते है
मेरे ब्लाग पर आप सबका हार्दिक स्वागत है, शीघ्र ही नयी पोस्ट प्रस्तुत करुंगा साहित्य और संगीत दोनों ही आत्मा को शुद्ध करते हैं, आपको अनुशासित रखते हैं और आपको भावनात्मक रूप से मजबूती भी प्रदान करते हैं । आइए, ऐसे ही कुछ विचार मेरे साथ बांट कर देखिए, अच्छा लगे तो ठीक, अच्छा न लगे तो आपकी इच्छा ।